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ट्रंप के टैरिफ से भारत को टेंशन नहीं! बाजार पर नहीं दिखेगा Reciprocal Tariff का असर

Updated : Mon, 31 Mar 2025 10:52 PM

अमेरिकी ने 2 अप्रैल से भारत सहित कई देशों पर पारस्परिक टैक्स लगाने का फैसला कर दिया है। हालांकि भारत इससे प्रभावित होता नहीं दिख रहा है। क्योंकि भारत के ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई सेक्टर अमेरिका से आने वाले उनके सेक्टर के आइटम पर शुल्क में कमी पर कटौती के लिए राजी हो गए हैं। भारत अमेरिका में सालाना लगभग 80 अरब डॉलर का निर्यात करता है।

आगामी दो अप्रैल से अमेरिका सभी देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा कर चुका है और पूरी उम्मीद है कि इस घोषणा पर अमल हो जाएगा। लेकिन भारत इससे प्रभावित होता नहीं दिख रहा है। क्योंकि भारत के ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई सेक्टर अमेरिका से आने वाले उनके सेक्टर के आइटम पर शुल्क में कमी पर कटौती के लिए राजी हो गए हैं।

 

पिछले एक माह से वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न सेक्टर के साथ पारस्परिक शुल्क को लेकर विचार-विमर्श कर रहे थे। गत 26-29 मार्च को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) पर वार्ता के लिए भारत आए अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल को यह संदेश दिया जा चुका है।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बादाम, सेब जैसे कुछ कृषि आइटम पर अमेरिका को शुल्क में राहत दी जा सकती है। भारत अमेरिका में सालाना लगभग 80 अरब डॉलर का निर्यात करता है। इनमें कृषि पदार्थ व खाने-पीने के आइटम, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, स्मार्टफोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, गारमेंट्स, लेदर आइटम, केमिकल्स व फार्मा, जेम्स व ज्वैलरी, प्लास्टिक आइटम शामिल हैं।

दूसरी तरफ, अमेरिका भारत में इन आइटम का सीमित मात्रा में निर्यात करता है। उदाहरण के लिए भारत से निर्यात होने वाले स्मार्टफोन व इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम पर अमेरिका में 0.41 प्रतिशत का शुल्क वसूला जाता है जबकि अमेरिका से भारत आने वाले इन आइटम पर भारत 7.24 प्रतिशत का शुल्क वसूलता है। भारत अमेरिका में 10 अरब डॉलर से अधिक का इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात करता है जबकि अमेरिका भारत में दो अरब डॉलर से भी कम के इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का निर्यात करता है।

 

इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क

ऐसे में अगर अमेरिका से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक आइटम पर शुल्क को घटाकर 0.41 प्रतिशत भी कर दिया जाता है या समाप्त भी कर दिया जाता है तो इससे भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गारमेंट, लेदर जैसे आइटम पर भी शुल्क कम करने से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि अमेरिका इन वस्तुओं का उत्पादन और निर्यात दोनों ही सीमित मात्रा में करता है।

 

अगले माह फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने वाले निर्यातक एस.सी. रल्हन के मुताबिक ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आइटम के साथ कृषि से जुड़े कुछ आइटम पर अमेरिका को शुल्क में राहत दी जा सकती है और अमेरिका को यह संदेश दिया जा चुका है। इसलिए दो अप्रैल से अमेरिका के पारस्परिक शुल्क का भारत के निर्यात पर असर नहीं होगा। हालांकि अभी यह किसी को पता नहीं है कि अमेरिका समान वस्तु को या फिर कुल व्यापार को ध्यान में रखते हुए पारस्परिक शुल्क लगाएगा। भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 36 अरब डॉलर का है।

 

मतलब भारत अमेरिका के मुकाबले 36 अरब डॉलर का अधिक निर्यात करता है। अगर 36 अरब डॉलर के इस व्यापार घाटे को कम करने को ध्यान में रखते हुए अमेरिका पारस्परिक शुल्क लगाता है तो फिर अमेरिका निर्यात होने वाले कई आइटम पर शुल्क में बढ़ोतरी हो जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी फिलहाल इस बारे में कुछ भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।